
बत्ती लाल हुई
गाड़ी रुकी
और फिर हर रोज़ की तरह
वो सारे बेबस हाथ
रोती बिलखती आत्माओं
के साथ
खिड़कियों पर आकर थम गए ।
किसी ने मुह फेर
अनदेखा किया
तो किसी ने
हाथ दिखाते कहा
'आगे बडो '।
उन लाचार आंखो
को उनके जीवन की
झांकिया देखने वाला शायद
ही कोई दर्शक मिलता होगा ।
ऐसे मे एक कमज़ोर कमउम्र
मेरे हिस्से मे भी लिखा था आज ।
प्रथा को बरकरार रखते हुए
गुप्पी साधे
हाथ फेलाए
मेरे द्वार पर खड़ा हो गया ।
उम्र लगभग पाँच साल
न्यूनतम वस्त्र
गले मे एक माला
हाथ मे कटोरा
बिखरे बाल
बहती हुई नाक
धूप में झुलसा बदन
और वो आँखे ......
जो इस उम्र में भी
अनगिनत कहानियाँ सुना जाती हैं ।
हमदर्दी से जेब मे
दो का सिक्का खोजता हाथ भी सोचता
है की आख़िर आज आता ही क्या है दो रूपये में ?
वैसे ये नन्ही जान भी
कहा तक समझती होगी
मेरे दो रूपये जुटेंगे तो
घूम फिर के किसी
की दारु की बोतल पर ही ।
इसमे इसका भी
क्या दोष ?
कंगूरे के तले पैदा
होने क बजाय
बस एक झोपडे के छप्पर
में आँख खोली थी ।
और तब से रोना
शुरू किया था जो आज तक
बंद नही हो पाया है ।
तपती सड़क पर
भूखे पेट तरसते
इन बच्चो से
आख़िर भूल कहाँ हुई होगी ?
मुझमे और इनमे अन्तर
कब आया ?
जन्म के बाद
पहला शब्द
क्या 'माँ' नहीं निकला होगा ?
तभी खामोशी
को तोड़ती एक आवाज आई -
'साहब ... पैसे दो ना !!!'
Suryoaham !!!
Thursday, February 28, 2008
दो रूपये
Posted by Surya at 9:00 AM 13 comments
Tuesday, February 26, 2008
दो कश्तियाँ

कोई है जो चाहता था
की हम मिले
भीड़ से तुझे उठाने को
संयोग का नाम तो कभी ना दू ।
कहते है दोस्ती और गहरी दोस्ती
में गंभीर वक्त मात्र का फासला है ।
गंभीर ही तो था -
रंगमंच पे पहली बार होने का भय ।
आधे मंच पर तू था और आधे पर मैं
इस विश्वास में की तालियों की गड़गड़ाहट
ही अब उतार पाएगी हमे ।
बाहर निकल कर तुझे
सीने से लगाने में सुकून मिला
केवल तूने महसूस किया
जो मेरे दिल मे था ।
"साथ है तो दुनिया जीतेंगे"
और दोस्ती ...
वो तो बिन कहे गहरी जो हो गई थी ।
वक्त के साथ साथ पता चला
की तू हर वक्त समस्याओ मे उलझा है
अब समस्याए तुझे घेरती है
या तू समस्याओ को घेरता है
फलस्वरूप मुझे तेरे साथ
रहने के मौके निरंतर मिलते रहे।
रात रात तक टंकी पर बैठना
आखरी रात जग कर पढ़ना पढ़ाना
सीडियों पे आते जाते लोगो को परेशान करना
क्लास मे सोना
उधार माँगना
सडको पे चीखना चिलाना
घर पे छुपना छिपाना
सब तो साथ मे किया था ।
फिर युही किसी की नज़र लग गई ।
हँसी , झूठी मुस्कान मे
बकबक , मौन मे
और साथ , ... दिखावे मे ।
हम , तू और मैं मे
ऐसे तू और मैं मे जो एक कश्ती मे ना थे ।
चीज़े इतनी जल्दी और इस कदर बदलेंगी
किसने सोचा था ।
सोचा तो बस ये की
"साथ है तो दुनिया जीतेंगे"
दूरियां भले ही ना मिटे
रंग चाहे फीके दिखे
वो वक्त आए ना आए दुबारा
मैं ज़रूर रहूंगा हर वक्त ।
और दुनिया तो जीतनी है मेरे दोस्त
फरक सिर्फ़ इतना होगा
की पूर्वी तेरी और पश्चिमी मेरी ।
...... रंगमंच की ही तरह ।
Posted by Surya at 6:22 AM 7 comments
Saturday, February 23, 2008
अंतर्मन

एक द्वंद में उलझा हुआ
एक आग में झुलसा हुआ
अंतर्मन खड़ा है आज
किस बात पर अडा है आज
कभी सूर्य सा उज्जवल है ये
कभी छाया काली रात सा
है ख़ुद में सवाल सा
चट्टान में दरार सा
अपने आप में उलझा हुआ
अपनी आग में झुलसा हुआ
हर चक्रवियु को भेदने की जिद पर अडा है आज
फिर सम्मुख अंतर्मन खड़ा है आज ।
- कृती
Posted by Surya at 8:28 AM 6 comments
Thursday, February 21, 2008
बोलो ना कब पीयोगे ?
'आज मेरा मैच था । '
'तुम्हे पता है एक बार पी लेनी चाहिए ।'
'पी लेनी चाहिए ?'
'हाँ भई पीकर एक दिन टल्ली हो जाओ पूरे । पीकर ना इंसान सिर्फ़ सच बोलता है , दिल मे बसा सब कुछ बाहर आ जाता है । '
'तो तुम्हे लगता है मैं तुमसे झूठ बोलता हूँ । '
'अरे ये कब कहा मैंने । तुमसे अच्छा कोई हो सकता है भला । '
'तो फिर क्या जरुरत पीने की । '
'ओहो जान , कंफेर्मेशन भी तो कुछ होता है । '
'मतलब तुम्हारी कंफेर्मेशन के लिए मुझे थोडी पीनी ही पड़ेगी । '
' थोडी नही.....टल्ली ....टल्ली होना पड़ेगा । '
'एकदम टल्ली ? '
'हाँ एकदम टल्ली , जब मेरे साथ हो तब ही । '
'अकेले अकेले ?'
'चलो मैं भी पी लुंगी , हम दोनों टल्ली हो जायेंगे । '
'मगर दोनों हो गए , तो तेरी कंफेर्मेशन का क्या ?'
'अरे हाँ , ये तो दिक्कत हो जायेगी । मतलब अब तुम्हे दो बार पीनी पड़ेगी । एक अकेले और एक मेरे साथ । '
'हाँ पढ़ाई-लिखाई छोड़ के दारु की भट्टी ही खोल देता हूँ । '
'अरे सीरियसली ... मजाक नही । '
'अच्छा बाबा , जब तुम्हारे साथ होऊंगा तो एक दफ्फे पी लूँगा ...एकदम अच्छे से ...'
'ये की ना बात '
'एकदम टल्ली'
'सीख रहे हो । '
'और फिर इतने नशे मे सुत्भुत तो होगी नही । ऐसे मे दूर दूर तक तुम्हारे सिवाय कोई होगा भी नही, तो मैं कुछ ऐसी वैसी हरकत कर बैठु तो ....'
'तुम अपने किसी मैच के बारे मे बता रहे थे ना ?'
Posted by Surya at 1:17 AM 5 comments
Sunday, February 17, 2008
मैं समझता हूँ !
इतने पानी के बाद तो
राह चलते किसी का भी छेड़ना
"प्यार मे शब्दों की कोई जगह नही होती ।"
- सूर्या
Posted by Surya at 10:20 PM 6 comments
Saturday, February 16, 2008
स्वागत है आपका
सुप्रभात !!
जी हाँ सुप्रभात । यहाँ की येही बात सब से अनोखी है । यहाँ सूर्य पर हर सूर्यवंशी एक दूसरे को सुप्रभात ही कह पाता है।यानी पृथ्वी की तरह यहाँ रात-दिन का चक्रव्यु नही चलता है । अपार रौशनी। अत्याधिक तप। और निरंतर काम। इस ब्रहमांड के लिए यहाँ निरंतर उर्जा बनाईं जाती है ।
आपको ताज्जुब हो रहा होगा की यहाँ भी हिन्दी भाषा कैसे ? दरअसल ये भाषा लगभग ६००० हज़ार वर्ष पहले एक सूर्यवंशी द्वारा ही आपकी पृथ्वी पे लायी गई थी । जिसका श्रेय आप सभी मानव गर्व से लेते है । खैर इस बात को मुद्दा बनाना ना ही हमने तब आवश्यक समझा था और ना ही हम अभी समझते है ।
ज्ञान ...... अधूरा ज्ञान आपको यहाँ तक खीच लाया है । सब जानने की , सब समझने की मानव प्रकृति - केवल एक ही ऐसा गुण जो सूर्यवंश का आप लोगो ने अभी तक सही रूप में संभाल रखा है ।
सबसे पहले मैं आपको अपना सही परिचय दे दू । मेरी बातो से शायद मैं आपको एक सूर्यवंशी ही प्रतीत होऊ , मगर आप ही की तरह मैं भी पृथ्वी से आया एक मानव हूँ । बस आप से कुछ समय पहले यहाँ आ गया था और इस कारण अब आते हुए अपने परिजनों का मुझे मार्गदर्शक बना दिया है । पहले तो मैंने साफ मना कर दिया था पर जब कप्तान की उपाधि का लोभ दिया तो मैंने सोचा आख़िर किसी को तो बनना ही है और फिर हममे कौनसी कमी है । तो इस तरह हम बन गए यहाँ के कप्तान उर्फ़ कैप्टेन सूर्या ।
तो मुद्दे की बात ये है की हम सभी यहाँ एक खोयी हुई तमन्ना ढूँढ रहे है या कुछ लोग उसको जीवन का अवशेष भी कहना पसंद करे । और आपकी एक और ग़लतफहमी दूर किए देता हूँ, वो रहस्य यहाँ ज़रूर है लेकिन मेरे पास नही । मैं आप ही की तरह उसी की तलाश में घर से निकला था और आज तक अकेला भटकता रहा । चलो अब कम से कम साथ तो हो गया है । सारे सूर्यवंशी काम में लगे रहते है तो हम जैसो के लिए यहाँ अकेला रहना दुश्वार है । अब हर मौके पे यार लोग बतिया तो सकेंगे । बड़ा वक्त हुआ किसी अपने से बात किए हुए ।
खैर अब तो मिलना बना रहेगा ।
स्वागत है आपका सूर्य पर !!!!
रास्ता भटक जाए तो पूछने में संकोच ना कीजियेगा ।
कैप्टेन सूर्या
Posted by Surya at 3:44 AM 6 comments
